बस या ट्रेन की खिडकियों से जब खेतों की ओर नज़र जाती है तो वो बचपन अनायास ही याद हो आती है। बीबी और बच्चो पर नज़र पड़ते ही थोडा मायुश भी होता हूँ। उनकी जिम्मेवारी मुझे शायद व्यस्क बना दे मगर दिल तो फिर भी गा ही उठता है .....दिल तो बच्चा है जी ......
Monday, March 29, 2010
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