दिमाग़-पच्ची मत कीजिए अपना भी और हमारा भी...| आई पी एल का मैच देखिए या फियर फ़ाईलस मगर ई सरबजीत वाला मेटेर अब मत उठाइए| कितना बर्दाश्त करेगा सरकार भी हररोज़ उसकी बहन आ जाती थी...ई शिंदे जी के पास..लोग धाकिया रहे थे उनको ई एकदम ग़लत बात...| बच्चा पेड़ पर चढ़ जाय तो ज़्यादा डांटो मत...उपर से कूद नहीं जाएगा...दिन भर बैठल रहेगा और तुमलोग बस कांव-कांव करते रहना| अपने-आप उतरकर आएगा तुम्हारे पास फिर कान पकड़कर पूछना...एगो का तो कान शायद पगड़ी में घुसल रहेगा...दूसरे का झोट्टा ही पकड़ लेना...लेकिन पूछना ज़रूर| भक...भरोसा नहीं है तुमपर...तुम्हारा मूड का भी तो ठीक नहीं | के-के-आर है दिल्ली डेयर डेविल है, भाई ई बुल्लुका किसका टीम है...
Thursday, May 2, 2013
Monday, March 29, 2010
Dil to Bachcha Hai Jee
बस या ट्रेन की खिडकियों से जब खेतों की ओर नज़र जाती है तो वो बचपन अनायास ही याद हो आती है। बीबी और बच्चो पर नज़र पड़ते ही थोडा मायुश भी होता हूँ। उनकी जिम्मेवारी मुझे शायद व्यस्क बना दे मगर दिल तो फिर भी गा ही उठता है .....दिल तो बच्चा है जी ......
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